Sachidanand Hiranand ‘अज्ञेय’ | NCERT 12TH | Hindi | Aaroh Bhag 2

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ | NCERT 12TH | Hindi | Aaroh Bhag 2

 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’

;सन् 1911-1987द्ध

अज्ञेय का मूल नाम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन है। उन्होंने

अज्ञेय नाम से काव्य-रचना की। उनका जन्म वुफशीनगर ;उत्तर

प्रदेशद्ध में हुआ था, ¯कतु बचपन लखनऊ, श्रीनगर और जम्मू में

बीता। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अंग्रेशी और संस्कृत में हुई। ¯हदी

उन्होंने बाद में सीखी। वे आरंभ में विज्ञान वेफ विद्यार्थी थे। बी.एससी. करने वेफ बाद उन्होंने एम.

ए. अंग्रेशी में प्रवेश लिया। क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने वेफ कारण उन्हें अपना अध्ययन बीच

में ही छोड़ना पड़ा। वे चार वर्ष जेल में रहे तथा दो वर्ष नशरबंद।

अज्ञेय ने देश-विदेश की अनेक यात्राएँ कीं। उन्होंने कई नौकरियाँ कीं और छोड़ीं। वुफछ समय तक

वे जोधपुर विश्वविद्यालय में प्रोप़्

ोफसर भी रहे। वे ¯हदी वेफ प्रसि( समाचार साप्ताहिक दिनमान वेफ

संस्थापक संपादक थे। वुफछ दिनों तक उन्होंने नवभारत टाइम्स का भी संपादन किया। इसवेफ अलावा

उन्होंने सैनिक, विशाल भारत, प्रतीक, नया प्रतीक आदि अनेक साहित्यिक पत्रा-पत्रिकाओं का

संपादन किया। आशादी वेफ बाद की ¯हदी कविता पर उनका व्यापक प्रभाव है। उन्होंने सप्तक परंपरा

का सूत्रापात करते हुए तार सप्तक, दूसरा सप्तक, तीसरा सप्तक का संपादन किया। प्रत्येक सप्तक में

सात कवियों की कविताएँ संगृहीत हैं जो शताब्दी वेफ कई दशकों की काव्य-चेतना को प्रकट करती हैं।

अज्ञेय ने कविता वेफ साथ कहानी, उपन्यास, यात्रा-वृत्तांत, निबंध, आलोचना आदि अनेक

साहित्यिक विधाओं में लेखन कार्य किया है। शेखरµएक जीवनी, नदी वेफ द्वीप, अपने-अपने

अजनबी ;उपन्यासद्ध, अरे यायावर रहेगा याद, एक बूँद सहसा उछली ;यात्रा-वृत्तांतद्ध,

त्रिशंवुफ, आत्मने पद ;निबंधद्ध, विपथगा, परंपरा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जयदोल और

ये तेरे प्रतिरूप ;कहानी संग्रहद्ध प्रमुख रचनाएँ हैं।

अज्ञेय प्रकृति-प्रेम और मानव-मन वेफ अंतद्र्वंद्वों वेफ कवि हैं। उनकी कविता में व्यक्ति की स्वतंत्राता

का आग्रह है और बौ(िकता का विस्तार भी। उन्होंने शब्दों को नया अर्थ देने का प्रयास करते हुए, ¯हदी

काव्य-भाषा का विकास किया है। उन्हें अनेक पुरस्कार मिले हैं, जिनमें साहित्य अकादमी पुरस्कार,

भारत भारती सम्मान और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रमुख हैं।

उनकी मुख्य काव्य-कृतियाँ हैंµभग्नदूत, ¯चता, हरी घास पर क्षणभर, इंद्रधनु रौंदे हुए ये,

आँगन वेफ पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार आदि। अज्ञेय की संपूर्ण कविताओं का संकलन

सदानीरा नाम से दो भागों में प्रकाशित हुआ है।

यह दीप अवेफला कविता में अज्ञेय ऐसे दीप की बात करते हैं जो स्नेह भरा है, गर्व भरा

है, मदमाता भी है ¯कतु अवेफला है। अहंकार का मद हमें अपनो से अलग कर देता है। कवि

कहता है कि इस अवेफले दीप को भी पंक्ति में शामिल कर लो। पंक्ति में शामिल करने से

उस दीप की महत्ता एवं सार्थकता बढ़ जाएगी। दीप सब वुफछ है, सारे गुण एवं शक्तियाँ उसमें

हैं, उसकी व्यक्तिगत सत्ता भी कम नहीं है पिफर भी पंक्ति की तुलना में वह एक है, एकाकी

है। दीप का पंक्ति या समूह में विलय ही उसकी ताकत का, उसकी सत्ता का सार्वभौमीकरण

है, उसवेफ लक्ष्य एवं उद्देश्य का सर्वव्यापीकरण है। ठीक यही स्थिति मनुष्य की भी है। व्यक्ति

सब वुफछ है, सर्वशक्तिमान है, सर्वगुणसंपन्न है पिफर भी समाज में उसका विलय, समाज वेफ

साथ उसकी अंतरंगता से समाज मशबूत होगा, राष्ट्र मशबूत होगा। इस कविता वेफ माध्यम से

अज्ञेय ने व्यक्तिगत सत्ता को सामाजिक सत्ता वेफ साथ जोड़ने पर बल दिया है। दीप का पंक्ति

में विलय व्यष्टि का समष्टि में विलय है और आत्मबोध का विश्वबोध में रूपांतरण।

मै ने देखा एक बूँद कविता में अज्ञेय ने समुद्र से अलग प्रतीत होती बूँद की क्षणभंगुरता

को व्याख्यायित किया है। यह क्षणभंगुरता बूँद की है, समुद्र की नहीं। बूँद क्षणभर वेफ लिए ढलते

सूरज की आग से रंग जाती है। क्षणभर का यह दृश्य देखकर कवि को एक दार्शनिक तत्व भी

दीखने लग जाता है। विराट वेफ सम्मुख बूँद का समुद्र से अलग दिखना नश्वरता वेफ

दाग से, नष्ट होने वेफ बोध से मुक्ति का अहसास है। इस कविता वेफ माध्यम से कवि

ने जीवन में क्षण वेफ महत्त्व को, क्षणभंगुरता को प्रतिष्ठापित किया है।

Chapter 3 – सच्चिदानंद हीरानंद वात्सयायन अज्ञेय

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